मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २२३ ३ राम नाम साकर कटका हॉ रे, मुख आवे अभी रस गटका। हॉरे जेने१ राम भजन प्रीत थोडी, तेनी२ जी मड़ली लियो ने तोड़ी। हॉरे जेने राम तना गुण गाया, तेने जमुना मार न खाया। हॉ रे गुण गाये छे मीराँ बाई, तुम हरि चरने जाओ धाई। बोल माँ बोल माँ बोल माँ रे, राधिका सुन बिन बोल माँ रे। साकर सेरड़ी स्वाद तजी ने, कड़वो लिवड़ो३ घोल माँ रे। चान्दा सूरजने तेज तजी रे, आगिया सधाथे प्रीत जोड माँ रे। हीरा माणक जेवर तजी ने, कथीर सधा थे मनी तोल माँ रे। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, सरीर आप्यूँ समतोल माँ रे ॥३७२॥† उपर्युक्त पद का प्रथमांश "राम नाम जाओ धाई। अभिव्यक्ति के आधार पर प्रक्षिप्त ही प्रतीत होता है। द्वितीयांश "बोल माँ रे प्रीत जोड माँ रे।" प्रथम पद (स० १) की ही पुनरुक्ति है। ऐसे पद निश्चित रूप से प्रक्षिप्त कहे जा सकते है। ४ मुझ अबला ने मोटी नीरात थई सामलो घरे, तु म्हारे साँचुरे। खाली धडाऊँ बीटलबर केरी, हार हरिनो म्हारे हिय रे। तीन माल चतुर भुज चुडलो, सिद्ध सोयी धरे जाइये रे। झाझरिया जगजीवन केरा, किसन गला री कठी रे। बिछुवा घुँघरा रामनारायण, अनवट अन्तरजामी रे। पेटी घड़ाऊ पुरुषोतम केरी, ने टीकम नाम नूं तालो रे। कुञ्जी कराऊँ .करुणा नन्द केरी, ते मा गैषा नू माँरू रे। सासर बासो सजी ने बैठी, अब नथी४ काँचू रे। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि नु चरणे जाचू रे। ३७३।।† १ जिसको, २ उसकी, ३ नीम, ४ नही।