मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह ५ मुखडानी माया लागी रे, मोहन प्यारा, मुखडानी माया लागी रे। मुखडूँ मै जोयूँ१ त़ासूँ सर्व जग थे यूँ२ खारूँ, मन मारूँ, रहियूँ न्यारूँ रे। संसारी नो सुख एवो३ झाझवाना नीरं जे बूँ४, तेने तुच्छ करी फेरिये रे। ससारी नो सुख काचूँ, परणी ने रड़ावु पाछूँ, तेने घर सीद५ जइये रे। परणूँ तो प्रीतम प्यारो, अखण६ सौभाग्य मारो, राण्डवानो भय टाल्यो रे। मीराँ बाई बलिहारी आशा मूने एक तारी, हवे७ हूँ तो बड भागी रे। ॥३७४॥† ६ काम नही आवे तो काम नही आवे प्रभु बिना तुम्हारे काम नही आव। खचि खचि अन्न वो भोजन बनायो, तापरे तन तापकर लगायो रे। रत्न जतन करि एहि पुतर जायो, छनो छनो बाबु लाड लडायो रे। तिरया कहे तोरे साथ चलूँगी, लुटि लुटि वाको धन खायो रे। काढ काढ करे घर की बाहरी छनुरे रहेवा न पाया रे। बाई मीराँ थे प्रभु गिरधर नागुण, चरणे रही चरण न धरायो रे। ॥३७५॥† ७ हाँ रे चालो डाकोर माँ जई बसिये। हाँ रे मने रग लगाडी रग रसिये रे। हाँ रे प्रभात ने पहोर माँ नोबत बाजे। हाँ रे अमे दरसन करवा जइये रे। हाँ रे अटपटी पाग केसरियो बाधो रे। हाँ रे काने कुण्डल सोइये रे। हाँ रे पीला पीताम्बर जरकस जामा। १ देखा, २ हुआ, ३ ऐसा, ४ जैसा, ५ उसको, ६ अखड ७ अब।