मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह रिख पतनी पर कृपा कीन्ही, विप्र सुदामा की विपति विदारण। मीराँ के प्रभु मो बदि पर, एती अंबेरी भई किण कारण। ॥३९७॥ १२ म्हा नैणा आगे रहीजो जी स्याम गोविन्द। दास कबीर घर बालद जो लाया, बासदेव का छान छबन्द। दास धना को खेत निपजायो, गज की टेर सुनन्द। भीलणी का बेर सुदामा का तदुल, भर मूठडी, बुकन्द। करमी बाई को खीच आरोग्यो१, होइ परसण पाबन्द। सहस गोप बीच स्याम बिराजै, ज्यो तारा बिच चन्द। सब संतो का काज सवाँरे, मीराँ सूँ दूर रहन्द। ॥३९८॥ उपर्युक्त दोनो पद इस श्रेणी के अन्य पदो से अलग पड़ते है, क्योकि इनमे निर्वेद की भी भावना झलकती है। इस पद मे प्रयुक्त 'मीराँ 'सूँ दूर रहन्द' जैसी टेक भी अन्य पदो मे प्राप्त नही। मिश्रित भाषा में प्राप्त पद १ राम गरीब निवाज, मेरे सिर राम गरीब निवाज। ऋचन कलस सुदामा कूं दीनो, हींडत है गजराज। रावण के दस मसतग छेदे, दीयो भभीखण् राज। द्रोपती सती को चीर बंधायो, अपणे जन के काज। मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, कुल की राखी लाज ॥३९९॥ १ खाया।