भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२४२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह जो कोई ल्यावै श्याम वैद कूँ, तो उठि बैठूँ हसिके री । भृकुटि कमान वान बाँके लोचन, मारत हिय कसिके री । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, कैसो रहो घर बसि के री ॥४१५॥† पाठान्तर १, हे माँ बड़ी बड़ी आँखियन वारो साँवरो, मो तन हेरत हँसि के । भौंहैं कमान वान वाके लोचन मारत हियरे कसि के । जतन करो, जतन लिख बाँधो, ओषध लाऊ घसि के । ज्यो तोको कछु और बिथा हो, नाहिन मेरो बसि के । कौन जतन करो मेरी आली, चदन लाऊ घसि के । जन्तर मन्तर॒ जादू टोना, माधुरी मूरत बसि के । साँवरि सूरत आनि मिलावो, ठाडी रहूँ मै हँसि के । रेजा रेजा भयो करेजा, अदर देखो धसि के । मीराँ तो गिरधर बिन देखे, कैसे रहे घर किस के ।† उपर्युक्त पाठ की अभिव्यक्ति मे असंगति है । 'चन्द्रसखी' के नाम पर भी एक ऐसा ही पद प्रचलित है — हँस के री, माँ री, मेरा मन ले गये आँखनवारो क्वारो, हँसि के । भौंहे कवान वान जाके, लोचण मेरे हिवड़े मार्या कस के । रेजा रेजा भयो करेजा मेरो, भीतर देखो धस के । जतन करो, जन्तर लिखि ल्यावो, ओखद लावो घस के । रोम रोम विष छाय रह्यो है, कारो खायो डस के । जो कोई मोहन आनि मिलावै, गले मिलूँगी, हँस के । चन्द्रसखी भज बालंकृष्ण छबि, क्या रे करु घर बस के । ६ अंब नही जाने दूँ गिरधारी, थारे म्हारे प्रीत लगी अति भारी । बाँको मुकुट काछनी सुन्दर, ऊपर जरद किनारी ।