भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२४० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह विभिन्न भाषाओं में प्राप्त पद १ कुबज्या ने जादू डारा री, जिन मोहैं श्याम हमारा । झरमर झरमर मेहा बरसे, झुक आये बादल कारा । निरमल जल जमुना को छाँडो, जाय पिया जल खारा । शीतल छाँय कदम की छोडी, धूप सहा अति भारा । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, बाही प्राण पियारा ॥४११॥† कही कही प्रथम पक्ति के द्वितीयांश का निम्नांकित पाठान्तर भी प्राप्त है -- “बिना भाल सुर मारा”। २ मेरे प्यारे गिरिवरधारी जी, दासी क्यो बिसार डारी । द्रोपदी की लाज राखी, सब दुख सो निवारी । प्रल्हाद पैज पारी, नृसिंह देह धारी । भीलनी के झूठे बैर खाये, कछु जात न बिचारी । कुब्जा सो नेह लायो, और गोतम की नारी तारी । प्यासी फिरो दरस बिन तलफो, मोहे काहे बिसारी । न्यासी फिरो दरस बिन तलफो, मोहे काहे बिसारी । मीरा के प्रभु दरसन दीजो, गिरिधर अपनी ओर निहारी । ॥४१२॥ ३ छैल, गैल मत रोकै तू हमारी रे । चाल कुचाल चलो जिन चंचल, ऐसी अनीती तैने करमी विचारी रे । सखी सग की देखत ठाढी, चरचा करेंगी सब पुरनर नारी रे ।


१ रास्ता ।

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