मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २३९ मै जल जमुना भरन गई थी, आगयौ कृष्ण मुरारी हे माय । ले गयो सारी अनारी हॉररी, जल मे उभी उघारी हे माय । सखी साइनी मोरी हँसत है, हँसि हँसि दे मोहि तारी हे माय । सास बुरी अरु नणद हठीली, लरि लरि दे मोहि तारी हे माय । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरण कमल की बारी हे माय ॥४०८॥† ११ वाटड़ली निहारा जी हरि ठाढौ । आप नही आवत पतियाँ नाही मेलत, छाती करी हरि ठाढी¹ । इत गोकुल उत मथुरा नगरी, जमुना बहै छै नाडी । आप जाय मथुरा मे बैठे, प्रीत रली उहाँ बाढी । हम को लिखि लिखि जोग पठावत, आप दूलह कुबज्या भई लाढी² । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, कहा करै जमुना आडी । ॥४०९॥ लगभग ऐसे ही पद गुजराती भाषा के पदो मे भी मिलते हैं। अन्तिम पंक्ति का द्वितीयांश अर्थविहीन है। १२ मोरी गलियन मे आवो जी घनश्याम । पिछवाडे आए हेला³ दीजी, ललित सखी हे म्हारो नाम । पैया परत हूँ बिनती करत हूँ, मत कर मान गुमान । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, तेरे चरण मे ध्यान । ॥४१०॥ १ कठिन, मजबूत, २ दूसरी पत्नी, ३ पुकार।