मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
गऊ भी तलफे बाच्छा भी तलफे, तलफे गुवाल बिचारा। जोगी भी तलफे जगम भी तलफे, तलफे समदर खारा। मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, तुम जीते हम हारा ॥४०६॥† ऐसी पदाभिव्यक्ति अन्य पदो से सर्वथा भिन्न पडती है। अन्तिम पंक्ति और शेष पद मे पूर्वापर सबन्ध का निर्वाह भी नही हुआ है। ९ मैया ले थारी लकरी, ले थारी कांवरी, बछिया हू न जाऊ री। सग के ग्वाल बाल सब बलिभद्र कूं मोकलो। ⁃ एकलो बन मे डराऊ री। सघन बन मे कछु खबर नहि परे। सग के ग्वाल सब मोहे डरावे रे। दादुर मोर पछी यूं रटे, कृष्ण कृष्ण कहि मोहि खिजावे। माखन तो बलिभद्र को खिलायो, हमको पिलाई खाटी छाछडी। वृन्दावन के मारग जातां, पाऊ¹ मे चेभत झीनी काकरी। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरण कवल तोरी आँख री॥४०७॥† उपर्युक्त पद का भाषा और भाव के आधार पर गुजराती पदो से गहरा समन्वय है। गुजराती भाषा का प्रभाव भी स्पष्ट है। प्रथम अर्द्धांश की भावाभिव्यक्ति का सूरदास के पदो से गहरा साम्य है। पद की छठी पंक्ति का शेष पद से पूर्वापर सबन्ध का निर्वाह नही होता। अन्तिम पंक्ति द्वितीयार्द्ध सर्वथा अर्थविहीन है। ऐसे पदो को गेय परम्परा का फल मानना ही अधिक युक्तियुक्त प्रतीत होता है। १० आज अनारी ले गयो सारी, बैठी कदम के डारी हो माय। म्हारी गैल² फर्यो गिरधारी, हे भाय आज अनारी ले गयो सारी।
१ पैर, २ पीछे।