मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २३७ ६ मन मोह्यो रे बसीवाला। काँधे कमरिया हाथ लकुटिया, मारियो नैना के भाल। यक बन ढूँढी सकल बन ढूँढे, कहूँ नही पायो नन्दलाल। मोर मुकुट पीताम्बर राजे, कानन कुडल छबी बिसाल। मीराँ प्रभु गिरधर जू की प्यारो, आनि मिल्यो प्यारी गोपाल। ॥४०४॥† पदाभिव्यक्ति मे पूर्वापर सम्बन्ध का निर्वाह नही हुआ है। ७ वाह वाह रे मोहन प्यारे, कहाँ चले जादू करि के। रुप सरूप सलोनी सी डारी, मेरो मन लीनू हर के। मोर मुकुट सिर छत्र बिराजै, नख पर गिरवर धर के। दमन कियो नाग काली को, आप घुसे मघ सर के। फण फण निरत करत यदुनन्दन, अमै कियौ बग बद के। सब ब्रजलोग छाँडि निज घरकूँ, जाई बसे तर गिर के। सात दिवस लग सूँड धार, जल इन्द्र पखो पग डर के। कातिग¹ मास बाल सब मिल कै, नाचै जल मे तिर के। चोर चोर पुनि बगल डार कै, जाय चढ़े छल करि के। वृन्दावत की कुज गलिन मे, रास रच्यो छल बल के। मीरां के प्रभु हरि अविनासी, पानै पडी गिरिवर के ॥४०५॥ पदाभिव्यक्ति असंगत है। ८ पाछो रथ फेरो द्वारका रारा। सूरज तलफे चदा तलफे, तलफे. नोलख तारा। १ कार्तिक।