भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२३६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह ४ नन्द को बिहारी म्हारे हियडे बस्यो छै। कटि पर लाल काछनी काछे, हीरा मोती वालो मुकुट धर्यो छे। गहिर ल्यो डाल कदम की, ठाडी गोहज मो तन हेरि हस्यो छे। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, निरखि दृगन मे नीर भर्यो छे। ॥४०२॥† पद की तृतीय पंक्ति सर्वथा अर्थहीन है। ५ मिथुला, कर पूजन की त्यारी। धूप दीप नैवेद्य आरती, सबही सौज लेआ री। बहु विध सूं पंकवान बनाकर, करो भोग की त्यारी। जीमेली१ म्हारो पिया गिरधारी, साधां ने बेग बुला री। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर चरणा पर बलिहारी। ॥४०३॥ पाठान्तर १, मिथुला, सुन यह बात हमारी। राज भोग की समै३ हुई है, बेग२ थाल सजला री। छप्पन भोग छतीसो विजन, सीतर जल की झारी। धूप दीप नई वेद४ आरती, कीजे वेग त्यारी। धरिये भोग विलम्ब नही कीजिये, मेरी मान पियारी। जीमे म्हाँरो प्यारो गिरधर, साधा ने बेग बुलारी। उपर्युक्त पद विशेष विचारणीय है। किसी अन्य को आज्ञा देकर पूजन की त्यारी करने की अभिव्यक्ति इस पद की विशेषता है। यहाँ “मिथुला” सम्बोधन भी किस के प्रति हुआ है यह एक विचारणीय प्रश्न है। १ भोजन करेगा, २ शीघ्र, ३ समय, ४ नैवेद्य।