मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 302, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २४९ पदाभिव्यक्ति अस्पष्ट है। अन्तिम पक्ति की भाषा शैली विशेष विचारणीय है। २३ आये आये जी महाराज आये। तज बैकुठ तज्यो गरुडासन, पवन वेग उठ ध्याये। जब ही दृष्टि परे नन्दनन्दन, प्रेम भक्ति रस प्याये। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरन कमल चित ल्याये ॥४३३॥† पदाभिव्यक्ति मे पूर्वापर सबन्ध का निर्वाह नही हुआ है। प्रथम दो पक्तियो से गज-उद्धार की कथा लक्षित होती है, परन्तु तीमरी और चौथी पक्तियो की अभिव्यक्ति सर्वथा भिन्न पड़ती है। २४ कोई ना जाने हरिया तारी गती, कोई ना जाणे। मिट्टी खात मुख देख जशोदा, चौदह भुवन भरिया। पडी पाताल वाली नाग नाथ्यो, सूर ने¹ शशी डरिया। डूबत ब्रज राखिलियो है, कर गोबर्धन धरिया। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, शरणे आयो तो तारिया ॥४३४॥ पद पर गुजराती प्रभाव स्पष्ट है। २५ निपट विकट ठौर, अटके री नैना मेरे। सुख सम्पति के सब कोई साथी, विपति परे सब अटके। तजि खगराज छुडायो, हाथी टेर सुने नही कहूँ अटके। मीराँ के प्रभु गिरिधर को, तजि मूरख अनत ही मरवो। ॥४३५॥† १ और।