भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२५० मीराँ-बृहद्-पद-सग्रह पद मे पूर्वा पर संबध का निर्वाह नही हुआ है, इतना ही नही तीसरी और चतुर्थ पंक्ति मे विरोधाभास भी बहुत स्पष्ट है। तृतीय पंक्ति का प्रथमाश अर्थ-हीन है, अन्तिम पंक्ति के अन्तिम शब्द “मरवो” का अर्थ नही लगता, अत उपयुक्त नही प्रतीत होता। उपर्युक्त परिस्थिति मे पद को प्रामाणिक मानना सम्भव नही। २६ जब ते मोहि नन्दनन्दन दृष्टि पड़चो माई। तब से परलोक लोक कछु न सुहाई। मोरन की चन्द्रकला सीस मुकुट सोहै। केसर को तिलक भाल तीन लोक मोहै। कुडल की अलक झलक कपोलन पर छाई। मानो मीन सरवर तजि मकर मिलन आई। कुटिल तिलक भाल चितवन मे टोना। खंजन अरु मधुप मीन भूले मृग छोना। सुन्दर अति नासिका सुग्रीव तीन रेखा। नटवर प्रभु वेष धरे रूप अति विशेषा। अधर बिम्ब अरुण नैन मधुर मन्द हाँसी। दसन दमक दाडिम दुति अति चपलासी। छुद्र घटिका किकनी अनूप धुनि सुहाई। गिरिधर के अग अग मीरा बलि जाई। ॥४३६॥ पाठान्तर १, जब से मोहि नन्दनन्दन दृष्टि पड़चो भाई। जमुना जल भरन गई, मोहन पर दृष्टि गई। गागंर भरि गृह चली, भवन न सुहाई। गृह काज भूलि गई, सुधि बुधि बिसराई।