भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २५१ सास नन्द उलझि परी, जाऊ कहाँ भाई। मोरन की चन्द्रकला कीरीट मुकुट सोहै। केसर के तिलक ऊपर तीन लोक मोहै। कानन मे कुडल कपोलन पर छाई। मानो मीन सरवर तजि मकर मिलन आई। काछनि कटि सोहै, पग नूपुर बिराजै। गिरधर के अग अग मीराँ बलि जाई। पाठान्तर २, जब ते मोहि नन्दनन्दन दृष्टि पड़्‌यो भाई। तब ते परलोक लोक कछु न सुहाई। मोर मुकुट चंद्रिका सु सीस मध्य सीहै। केसरि को तिलक ऊपर तीन लोक मोहै। साँवरो त्रिभग अंग चितवन मे टोना। खजन जौ मधुप मीन भूले मृग छौना। अधर बिम्ब असन नयन मधुर मद हाँसी। दसन दमक दाडिम दुति दमके चपला सी। छुद्र घटिका अनूप नुपुर धुनि सोहै। गिरिधर के चरणकमल मीराँ मन मोहै। पाठान्तर ३, जब ते मोहि नन्दनन्दन दृष्टि पर्यो भाई। तब तैं परलोक लोक कछु न सुहाई। मोरन की चन्द्रकला सीस मुकुट सोहै। केसर को तिलक भाल तीन लोक मोहै। कुडल की अलक झलक कपोलन परछाई। मानो मीन सरवर तजि मकर मिलन आई। भृकुटि कुटिल चपल नयन मधुर मद हाँसी।