मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह दसन दमक दाडिम द्युति दमकै चपलासी । कबु कठ भुज बिलासे ढीव तीन रेखा । नटवर को भेष भानु सकल गुण विशेषा । क्षुद्र घट किकनी अनूप धुन सुहाई । गिरिधर के अग अग मीराँ बलि जाई । पाठान्तर ४, जब ते मोय नन्दनन्दन दृष्टि पड़्यो भाई । हरि की कहा कहौं सुन्दरता बरनी नही जाई । मोरन की चन्द्रकला सीस मुकुट सोहै । केसर को तिलक् भाल तीन लोक मोहै । कुडल की अलक झलक कपोलन पर छाई । मानो मीन सरवर तज मकर मिलन आई । भृकुटि कुटिल अति विसाल चितवन मे टौना । खजन और मधुप मीन मोहै मृग छौना । नासिका अति अनूप मद मद हाँसी । दसन बरन दामिनि द्युति चमकत चपलासी । कुंभुक कंठ भुज विशाल गिरिव तीन रेखा । नटवर को भेख मानो सकल गुण विसेषा । क्षुद्र घटिका अति अनूप किकनि धुन सवाई । (उस) गिरिधर के अंग अंग मीराँ बलि जाई । उपर्युक्त पाठ के विभिन्न पाठान्तरो मे कुछ शब्दो का ही हेर फेर है। यद्यपि प्रत्येक पाठ मे कुछ शब्द निरर्थक है तथापि कही भी भाव मे कोई विशेष अन्तर नही पडने पाया है। २७ (१) कोई स्याम मनोहर ल्यो रे, सिर धरे मटकिया डोले । \ दधि को नाँव बिसर गई ग्वालन, हरि ल्यो हरि ल्यो बोले ।