मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह सब देवन मे शिवजी बडे है, तारन मे बडा चन्दा। सब भक्त मे भरथरी बडे है, शरण राखो गोविन्दा। मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण, चरण कमल चित चन्दा ॥४४४॥† ३५ कृष्ण करो यजमान, अब तुम कृष्ण करो यजमान। जाकी कीरत वेद बखानत, साखी देत पुरान। मोर मुकुट पीताम्बर सोहत, कुण्डल झलकत कान। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, दो दरशण का दान ॥४४५॥† ३६ माई मोरे नैन- बसे रघुबीर। कर सर चाप, कुसुम सर लोचन, ढारे भए मन धीर। ललित लवग लता नागर लीला, जब पेखो तब रनबीर। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, बरसत काचन नीर ॥४४६॥† ३७ दोनो ठाढे कदम की छइयाँ। गौर वरण है ज्येष्ठ हमारा, श्याम वरण मोरे सइयाँ रे। गौर के सिर जर कसबी नीरा, श्याम सिर मुकुट धरइया रे। गौर के नाव बलभद्र भइया, श्याम के नाव कन्हैया रे। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, दोनो मोरे शीश नवइया रे ॥४४७॥† ३८ गोरस लीने नन्दलाल, रसमाँ गोरस लीजे। मै हू वृषभानु नन्दिनी, तुम हो नन्दाजी के लाल। मोर-मुकट मुक्ता फूल कुन्डल, उर बैजन्ती माल। मै दंधि बेचन जाती वृन्दाबन, रोकत है बिना काज। बाई मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, बॉह गहे की लाज ॥४४८॥†