मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २५७ खड़ी बोली १ एरी बरजो जसोदा कान, मेरे घर नित्य आता है। जिधर को मै जाती हूँ, वह मेरे सामा ही आता है। मै जल जमुना भरन जात हूँ, मेरे सामा ही आता है। ककरी दे मोरी बहिया मरोरी, बारजोरी मचाता है। मै दहि बेचन जात वृन्दावन, चली पीछा से आता है। दहि मटकी फोड माखन, मेरा लुट खाता है। रास विलास करत गोकुल मे, बीसयाँ सुनाता है। मीराँ के गिरधर मिलियाँ, चरण मे लगता है ॥४४९॥† २ बसीवारे की चितवन सालति है। मोर मुकुट मकराकृत कुंडल, तापर कलंगी हालति है। मै तो छकी तुमरे छबि ऊपर, जो न छके ताहैं नालति है। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कवल चित लागति है। ॥४५०॥† ३ बता दे सखी सांवरियाँ को डेरो किती दूर। इत मथुरा उत गोकुल नगरी बीच बहे यमुना पूर। मथुरा जी की मस्त गुवालिनी मुख पर बरसे नूर। मीराँ के प्रभ गिरिधर नागर, सांवरे से मिलना जरूर। ॥४५१॥† १७