मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१ व्यक्ति मौलिक रूपेण मीराँ की ही है, मात्र भाषा ही गेय-परम्परा के कारण परिवर्तित हो गई है, प्रियकर हो सकता है और हमारी हृदयगत भावनाओ के निकटतर भी पड सकता है परन्तु खोज कार्य मे सहायक कदोपि नही हो सकता है। यह भी माना जा सकता है कि उनमे काव्य-सत्य है। - तथापि इस काव्य-सत्य के साथ ही साथ उनमे से वस्तुत सत्य को भी खोज निकालने का प्रयास आकाश-कुसुम को पाने का ही प्रयास मात्र होगा। प्राप्त रूप मे ऐसे पदो की प्रामाणिकता सदिग्ध ही सिद्ध होती है। - प्रस्तुत सग्रह मे भाव और भाषा के आधार पर ही पदो का वर्गी- करण किया गया है। मीराँ का जीवन कुछ विशिष्ट क्षेत्रो मे व्यतीत हुआ। अत उन विभिन्न क्षेत्रो की भाषा का प्रभाव उनकी रचना मे पाया जाना स्वाभाविक ही है। साधु-समागम के प्रभाव के कारण भी अन्य भाळाओ के कुछ शब्द-विशेष का प्रयोग भी सम्भव हो सकता है। परन्तु विभिन्न प्रान्तीय बोलियो मे इक्के-दुक्के पदो की रचना असम्भव ही प्रतीत होती है। अत ऐसे पदो को प्रक्षिप्त कहना ही युक्तियुक्त होगा। राजस्थान मे ही मीराँ ने जन्म लिया और राजस्थान मे ही उनका अधिकांश जीवन व्यतीत हुआ अत अधिकांश पदो का शुद्ध राजस्थानी - भाषा मे पाया जाना ही युक्ति-सगत है। फिर भी पुरानी राजस्थानी और आधुनिक राजस्थानी मे गहरा भेद है। अत राजस्थानी मे प्राप्त पदो की भाषा की शुद्धता पुरानी राजस्थानी के माप पर ही निर्धारित की जा सकती है। ऐसा एक प्रयास मैं कर भी रही हूँ और आशा रखती हूँ कि शीघ्र ही हिन्दी-साहित्य की यह छोटी सी सेवा भी कर सकूँगी। इसके बाद वे पद आते है जो मिश्रित भाषाओ के अन्तर्गत रखे गए है। इनमे से कुछ की भाषा प्रधानत राजस्थानी होते हुए भी ब्रजभाषा से प्रभावित है। तो अन्य कुछ की भाषा प्रधानत ब्रजभाषा होते हुए राजस्थानी से प्रभावित है। साधु-समागम के कारण भी भाषा का यह सम्मिश्रण सम्भव हो सकता है। अद्यावधि मीराँ का बृज-क्षेत्र मे गमन और निवास भी मान्य है। तथाकथित मीराँ के पदो की एक बडी सख्या ब्रजभाषा मे भी प्राप्त है। इनमे से कुछ की भाषा विशुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा है। ऐसे कुछ पद साहित्यिक सौन्दर्य का सृजन करने मे सूरदास के पदो से भी होड लेते है अद्यावधि प्राप्त सामग्री के आधार पर मीराँ की वृन्दावन-यात्रा और निवास बहुमान्य होते हुए भी सुनिश्चित इतिहास नही अपितु एक अत्यन्त विषाद-