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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२२ ग्रस्त विषय है। 'इन पदो की साहित्यिकता भी इनकी प्रामाणिकता के विरुद्ध ही गवाही देती है। मीराँ को शास्त्रीय अध्ययन का सुअवसर प्राप्त हुआ हाँ, ऐसा भी कोई निश्चित इंगित प्राप्त सामग्री मे नही मिलता। प्राप्त पद कवि की रचना न होकर एक स्वत सिद्ध भक्त के भावातिरेक के सत्यतम चित्र है। अतः शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा मे प्राप्त पदो की प्रामाणिकता विशेष सन्दिग्ध हो जाती है। • गुजराती मे भी मीराँ के नाम पर प्रचलित पद पर्याप्त सख्या मे प्राप्त होते नै। अपने जीवन के अन्तिम काल मे मीराँ का द्वारिका-गमन और निवास इतिहास सिद्ध है। अद्यावधि मान्य इतिहास, प्राप्त जनश्रुतियों और पदाभिव्यक्तियो से भी उपर्युक्त कथन का समर्थन होता है। • अत्युक्ति न होगी यदि कहा जाय कि प्राप्त सम्पूर्ण सामग्री मे यही एक ऐसा पहलू है जो सर्व-सम्मति से सुनिश्चित है। क्रमशः विकसित होते हुए जीवन के अन्तिम समय की भावाभिव्यक्ति मे इतने निम्न स्तर के घरेलू जीवन व अन्य बहुत ही हल्की भावनाओं का चित्रण बहुत सहज नही प्रतीत होता। चितौड़ के सम्पूर्ण राज-वैभव व तद्जनित सुख-सुविधा को "तजि बटुक की नाईं" अपने आराध्य के शरण मे द्वारिका आ जाने पर मीराँ जैसी भक्तिमती नारी की रचना मे विराग और नैराश्य की भावनाओ का मिलना ही अधिक सहज है। अस्तु, गुजराती में पद रचना असम्भव या असगत नही प्रतीत होती तथापि अभिव्यक्ति के आधार पर प्राप्त पदो की प्रामाणिकता मे संदेह ही उत्पन्न होता है। कुछ गुजराती मे प्राप्त पदो मे "मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर" "मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण" मै भी परिवर्तित हो गया है--बहुत सम्भव है कि गेय परम्परा ही इसका कारण हो, अस्तु, ऐसे पदो की प्रामाणिकता और भी सदिग्ध है। भोजपुरी, अवधी, बिहारी आदि विभिन्न बोलियो मे भी कुछ पद प्राप्त होते है। राजस्थान, ब्रज, और द्वारिका से बाहर भी कभी मीराँ ने प्रयाण किया हो ऐसा आभास कहीं कोई नही मिलता। साधु-समागम के कारण पडे प्रभाव के कारण भी ऐसे इक्के-दुक्के पदों की रचना सम्भव नही। अतः इन पूदो को निश्चित रूपेण प्रक्षिप्त कहा जा सकता है। खडी बोली मे प्राप्त कुछ पद भी भाषा की आधुनिकता के आधार पर निश्चित रूपेण प्रक्षिप्त ही कहे जा सकते हैं।