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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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प्रस्तुत सग्रह मे बहुत से पदो पर एक ऐसा † चिह्न लगा दिखा गया है। भाषा और भाव के आधार पर प्रक्षिप्त प्रतीत होनेवाले पदो पर ही यह चिह्न लगाया गया है। जैसा कि ऊपर कहा गया है बहुत सम्भव कि शेष पदों मे से भी अधिकांश प्रक्षिप्त ही हो परन्तु उनको प्रक्षिप्त या प्रामाणिक कहने का कोई सुनिश्चित सूत्र अद्यावधि उपलब्ध नही। बहुत सम्भव है कि प्राप्त सामग्री के गहरे अध्ययन के बाद शेष पदो पर भी निश्चय पूर्वक विचार किया जा सके। किसी ऐसे ही प्रामाणिक सग्रह के आधार पर ही मीराँ की जीवन-वृत्त को सुनिश्चित इतिहास का रूप दिया जा सकता है। इस सग्रह मे लिखित व मौखिक परम्परा से प्राप्त मीराँ के नाम पर प्रचलित सभी पदो को एकत्रित करने का प्रयास किया गया है, फिर भी बहुत सम्भव है कि और भी कुछ ऐसे पद प्राप्त हो सके जो इस सग्रह मे नही आ सके हैं। विभिन्न प्राप्त सग्रह; जिनकी सूची 'मीराँ, एक अध्ययन' मे दे दी गयी है, इन पदो के सग्रह का मूल आधार रही है। अत उन सभी विद्वानो की कृतज्ञ हूँ। श्री सूर्यनारायण जी चतुर्वेदी (जयपुर) द्वारा २०० पद ऐसे प्राप्त हुए जिनके बिना यह सग्रह निश्चित ही अधूरा रह जाता, अत मै उनकी विशेष कृतज्ञ हूँ। इन पदो मे अधिकांश राजस्थानी भाषा मे हैं। इनमे अधिकांश की अभिव्यक्ति मतभेद, सघर्ष और वियोग- द्योतक है। इन पदाभिव्यक्तियो से विभिन्न धार्मिक मतो का विशेषत सतमत का ही प्रभाव स्पष्ट हो जाता है। कुछ पदो के विषय मे अपने विचार (जो पद विशेष के नीचे दिये गये हैं) देकर इन्होने मेरे कार्य मे अधिक सुगमता ला दी। उनके इस कष्ट के लिये मै विशेष आभारी हूँ। भाई श्री नर्मदेश्वर जी चतुर्वेदी और उनके अग्रज हिन्दी के सुविख्यात विद्वान् श्री परशुराम जी चतुर्वेदी द्वारा सामग्री एकत्रित करने मे पर्याप्त सहायता मिली। अपनी राजस्थान की यात्रा-काल मे किसी दादू पन्थी सत के हस्त- लिखित सग्रह से प्राप्त ६२ पद आपने मुझ को दिये जिनमे लगभग ५० मेरे सग्रह मे थे और शेष पद नवीन थे। इनमे से अधिकांश नाथ- परम्परा प्रभाव द्योतक है। 'दासी' और 'जन' प्रयोग युक्त पद भी इस सग्रह का एक बडा भाग है। शेष पदो पर सतमत का ही विशेष प्रभाव है। इनमे अधिकांश की अभिव्यक्ति वियोगात्मक और भाषा राज- स्थानी व ब्रज मिश्रित राजस्थानी है।