मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४ उपर्युक्त पदो के सिवाय कुछ पद लोक-गीत परम्परा से भी प्राप्त हुए। विशेष प्रयास के करने बाद कुल १४ पदो को एकत्रित करने मे सफल हो सकीँ। ये पद भी 'मीराँ', एक अध्ययन' मे परिशिष्ट मे दे दिये गये है। लोक-गीत परम्परा से प्राप्त प्राय पद सग्रह मे वर्तमान किसी-न-किसी पद का गेय रूपान्तर मात्र ही सिद्ध हुए। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी-विभाग के अध्यक्ष हिन्दी के सुविख्यात विद्वान् श्री हजारीप्रसाद जी द्विवेदी ने पदो के वर्गीकरण के बारे मे जो महत्वपूर्ण सुझाव किये उनके बिना इस सग्रह को इस रूप में प्रस्तुत करना सम्भव न होता। "मीरा बाई" के विद्वान् लेखक डा० श्रीकृष्ण लाल ने अपनी कार्य-व्यस्त दिनचर्या के बाद भी सग्रह मे महत्वपूर्ण सुझाव देने और भूमिका लिखने का कष्ट स्वीकार किया। गुरुजनों के प्रति कृत- ज्ञता प्रकाश करना भी धृष्टता ही होगी, अत मै इनको नमस्कार ही करती हूँ। अनुज तुल्य श्री अवधेश तिवारी के सहयोग और कार्य-निष्ठा के बिना प्रस्तुत सग्रह असम्भव ही था। इन पदो की पुन पुन प्रतिलिपि करना सुगम या रुचिकर कार्य नही। उनकी अटूट लगन और कठिन परिश्रम के बिना यह सग्रह कदाचित तय्यार नही हो सकता था। अपने छोटे देवर श्री जानकी प्रसाद झुनझुनवाला, श्री गोपालचन्द सराफ और पुत्र तुल्य श्री बाल- कृष्ण मालवीय के विशेष सहयोग की महत्ता भी सदा अक्षुण्ण रहेगी। भाई श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव और भाई श्री सुधाकर पाण्डेय ने प्रूफ देखने का भार उठा कर मेरे कार्य को विशेष सुगम बना दिया। मानव-जीवन मे स्निग्ध भावनाओ का एक अपना विशिष्ठ स्थान है। अतः उपर्युक्त सभी स्वजनो के स्नेहमय सहयोग के लिये कृतज्ञता प्रकाशन या धन्यवाद दोनो ही असम्भव है। प्रस्तुत सग्रह मे जो अपूर्णता और गलतियाँ रह गई हो, उन पर प्रकाश डाल कर गुरुजन मेरा प्रोत्साहन और पथ-प्रदर्शन करेंगे, ऐसी ही आशा करती हूँ। विशेष प्रयास के बावजूद भी प्रूफ आदि की जो गलतियाँ छूट गयी हो, उनके लिये मै क्षमाप्रार्थिनी हूँ। पद्मावती