मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २५६ बिहारी बोली १ मैं तो लागी रहो नन्दलाल सो। हमरे बारहि दूज न पार। लाल लाल पगिया झिन झिन बार। साँकर खटोलना दुइ जन बीच। मन कइले बरष, तन कइले कीच। कहाँ गइले बछरु, कहाँ गइली गाय। कहाँ गइले धेनु चरावन राय। कहाँ गइले गोपी, कह गइले बाल। कहाँ गइले मुरली बजावनहार। मीराँ के प्रभु गिरधर लाल। तुम्हरे दरस बिन महल बेहाल ।।४५४।। पदाभिव्यक्ति असंगत और कही कही अर्थहीन भी है। २ हरि सो बिनती कर जोरी। बरबस रचल धमारी, हम पर मात पिता पारे गारी । निपट अल्प बुधि हीन, दीन गति थोरी, प्रेम मकान रसले बसोरी। मीराँ के प्रभु शरण तिहारी, ओचक आय मिलतु गिरधारी ।।४५५।।† पद की तृतीय पंक्ति अर्थहीन है। ३ जागिस गिरधारी लाल, भक्तन हितकारी। दासी हाजर खवास, कचन ले झारी।