भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२६० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह संऊच करो दंत धाबन, स्नान की तय्यारी । वस्त्र और पुष्प माल, तुलसी अति प्यारी । रत्न जटित आभूषण, मुकुट लटक वारी । धूप दीप नैवेद्य, आरती सवारी । मीराँ प्रभु विधी विधान चरणन चित हारी ॥ ४५६ ॥† पद की प्रथम पंक्ति से बिहारी प्रभाव स्पष्ट है तथापि शेष पद की भाषा शुद्ध ब्रजभाषा ही है। भाव और भाषा के आधार पर पद की प्रामाणिकता संदिग्ध है। पद की अन्तिम पंक्ति का निम्नांकित पाठान्तर प्राप्त है :— "जागिये गिरिधारी लाल भक्तन हितकारी" इस पाठान्तर के आधार पर पद शुद्ध ब्रजभाषा का हो जाता है। गुजराती में प्राप्त पद १ कन्हैया बल जाऊँ, अब नहि बसूँ रे गोकुल मे। काली ओढे कामली रे, काली हेरे कहान । वृन्दावन की कुंज गलिन मे, खेलत गोपी तज मान रे। घेर आईं गोवालन, घेर आये गोवाल । हरिह जु नहि आये रे, मेरे मदन गोपाल । सोने की बँसरिया, रूपे की जजीर । गावे न बजावे कान जी, भट जमुना के तीर । जमना के नीरे तीरे बँगला बनावुँ । बँगला के भीते भीते बेर बेर प्रेम चणाऊँ । 'मीराँ' के प्रभु गिरिधर प्यारे लाल । अब कोई मत पडो रे, मेरे ख्याल ॥४५७॥† २ लेने तुरी लकंडी रे, लेने तुरी कामली, गायो तो चरावा नहिं जाऊँ मावडी । माखन तो बलभद्र ने खायो, हमने खायो खाटी हो रे छाँशडली ।