भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २६१ • वृन्दाबन ने मारग जाता; पाँवों मे खुंचे१ झीनी काँकडली । मीराँ बाई के प्रभु गिरधर नागुण, चरण कलम चित राखडली ॥४५८॥† ३ नन्दलाल नही रे आऊँ मुझे घरे काम छे,तुलसीनी माला मे श्याम छे । वन्द्राते वनने मारग जता, राधा गोरी ने कान श्याम छे । वन्द्राते वन में रास रचो छे, सहस्त्र गोपी मैं एक श्याम छे । वन्द्राते वन ने मारग जाता, दान आथानि२ धनी हाम३ छे । वन्द्राते वननी कुञ्ज गलिन में, घरे घरे गोपियो मे डाम छे । आनी तेरे गगा वाला पेरी तेरे जमुना, वह माँ गोकुल यू गाम छे । गामना वालो ना मारे महीना वलोना,महिणा धुनियानी घनी हाम छे । बाई मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरन मे सुख स्याम छे ॥४५९॥† ४ वारे वारे कहोने कहीए दिलडानी वातो, वारे वारे कहोने कहीए । आगे तमे बोलड़ा बोल्या मारा राज । ते बोलड़ा सभारी४ मने कहे ताँ आवे लाज । पाँडवोनी प्रतिज्ञा पाली, द्रौपदी नी राखी लाज । सुदामानी वेला वारी, उगार्यो प्रह्लाद । प्रजापतिए नीभामाँ पूरियाँ , माँहे देवेतानो वास । माजारी५ ना बच्चा रे राख्याँ, एवा श्री महाराज । वृन्दावन थी सालुडा लाव्या६, राधाजी ने काज । पहेरी ओढी महेले आव्या, रीझया श्री महाराज । बाई मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, सोहागी बनी सजी सीज़॥४६०॥† १ चुभती हैं, २ देनेकी, ३ इच्छा, ४ सुनकर, ५ बिल्ली, ६ लाये ।