भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 315, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 315

२६२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह ५ आँखलडी बाँकी रे, अलबेला तारी, आँखडली बाँकी । चारवणीमाँ मारा चित्त चोरी लीधा१,नेणे मोहनी नाखी । नेण कमलना भलका२ मारे, अेणे मार्या ताकी ताकी रे । मीराँ के प्रभु गिरधर नागुण,नीत चरण कमलनी दासी रे ॥४६१॥† ६ झगडो लाग्यो श्री जमना जी आरे, चल्याने माँरे शुं छे । वृन्दावन ना मारग जाताँ, हॉरे आगल आवी३ का घेरे । वृन्दाबननी कुज गलीन माँ, पालव आवी का झेरे । बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर नागुण,गोपी ओने लाड लडावे ॥४६२।।† ७ कोण भरे रे पानी कोण भरे, जमनानाँ पाणी कोण भरे । घर म्हारूँ दूर गागर शिर भारी, अरे खोटी थाँऊ तो घेर बेठणी बढे । शिर पर कलश कलश पर झारी, झारी पे बेठी झारी मोज करे । आणी तेरे गगा पेली तीरे जमना, वचमाँ४ कानुडे रग रास रमे५ । साव सोनानो मारो घाट घडुलो, उठाणीए तो रत्न कनक जडे । मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल चित्त ध्यान ठरे ॥४६३॥† ८ चाल सखी वृन्दाबन जइये, जीवन जोवाने६, महीनी भटुकी ओ माथे लई । श्याम सुन्दर ने भावे भेट जो, तेणे दुखडा सहु शमावशे७ रे । मीराँ बाई प्रभु गिरधर नागर, भावजी मारग माँ आवशे रे ॥४६४।।† १ लिया, २ चमक, ३ आकर, ४ बीच मे, ५ खेले, ६ देखने के लिए, ७ शामिल हो जावेगे, नष्ट हो जावेगे ।

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक) · पृष्ठ 315, कुल 365 में से · BharatKosha