मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २६३ ९ चढी ने कदम्ब पर बैठो रे, वालो मारो चीर तो हरी ने। माता जसोदा नो कुँवर कन्हैया, नागर नन्दजी नो बेटो रे। मोर मुकुट सिर बिराजे, पहिर्यो छे पीलो लपेटो रे। नहाया धोया मै केम१ करी आवी ये, नाखो२ ने नवरग रेटो रे। बाई मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, को उतारू ने अने हेठो३ रे ॥४६५॥† १० नाव रीसायो रे, बेनी मारो नाव रीसाचो रे। चोरामा जोया४ ने चौटामाँ जोयो, फलीयाँ जोयाँ पूरी पूरी ने। हाथ माँ दीवलडो ने घेर घेर जोती, जोती अणे धणु५ रोती। बाई मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल चित देती ॥४६६॥† ११ कानुड न जाणी मोरी पीर। बाई हुँ तो बाल कुँवारी रे, कानुडे न जाणी मोरी पीर। जलरे जमनाँ अमे पाणीडाँ गया ना, वाहला कानुडे उठाडाया आच्छानीर ।। उडाया फर ऽऽऽ रे। वृन्दा रे वनमाँ वालछै, रास रच्यो सोलसे गोपियाँ ताण्याँ चीर। फाट्योँ चर ऽऽऽ रे। हुँ६ वरणागी काहना तमारो७ र नामनी रे, कानुडे मारया छे अमने तीर। वाग्योँ अरऽऽऽरे। बाई मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, कानुडे बाली ने फेकी ऊँचे नीर। राख ऊँडे फर ऽऽऽ रे ॥४६७॥† १ कैसे, २ डालो, ३ नीचा, ४ देखा, ५ बहुत, ६ में, ७ तुम्हारा।