भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २८३ हाँरे वा'ला मै जलबीच उघाडी । उभी राधा अरज करत है, दो चीरदो ओ गिरधारी । प्रभु मैं तेरे पाय परूँगी । जो राधा तेरो चीर चहावत हो, जल से हो जा न्यारी । हाँ रे, वा'ला जल से हो जा न्यारी । जल से न्यारी कान्हा कबुए न होव्गी, तुम हो पुरुष हम नारी । लाज मोकूँ आवत भारी । तुम तो कुँवर नन्दलाल कहावो, मैं बृषभानु दुलारी । हाँ रे, वा'ला मे वृषभानु दुलारी । मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, तुम जीते हम हारी । चरण जाऊँ बलिहारी ॥ ५०६ ॥† उपर्युक्त पद की भाषा पर खडी बोली का और शैली पर गुजराती भाषा मे प्राप्त पदों की शैली का प्रभाव सुस्पष्ट है । गुजराती में प्राप्त पद १ वारो यशोदा तारा दानी ने, आली गारा आल करे छे । लाडकवायो बाई लामज तमने, ते थी घनो राधा राणी ने । जल यमुना जतॉ मारगे पालव, ग्रहियो मारो तानी न । एक बार साख्युं बीजी बार साख्युं शरम तमारी घनी आनी ने । बाई मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल चित मानी ने ॥५०७॥† २ बोले झीणा मोर, राधे तारा डुँगरिया पर बोलेझीणा मोर । ए मौर ही बोले ब पैया ही बोले, कोयल करे घन शोर । ······भली बीजली चमके, बादल हुआ घन घोर । झरमर झरमर मेहुलो बरसे, भीजे मारा सालुडानी कोर । बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण,प्रभुजी म्हाँरा चितडानो चोर॥५०८॥†