मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 339, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २८६ सोने की नाही कान्हा, रूपे की नाही, हरे बाँस की पोरी । काहे से गाऊँ राधे, काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गैया घेरी । मुख से गाओ प्यारे, ताल से बजावो, लकुटिया से लाओ गैया घेरी चन्द्रसखी भज बालकृष्ण छबि, हरि चरणन की चेरी । ११ चालो मन गंगा जमुना तीर । - गंगा जमुना निरमल पाणी, सीतल होत सरीर । बसी बजावत गावत कान्हा, सग लियो बलबीर । मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, कुडल झलकत हीर । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल पै सीर ॥५२०॥ उपर्युक्त पद मे कुछ पक्तियाँ निम्नांकित रूप मे भी प्राप्त है - द्वितीय पंक्ति :- “या बसी मे मेरो प्राण बसत है, वो बसी लेई गई चेरी ।” चतुर्थ पंक्ति मे “घड़ी” शब्द के बदले 'घटी” का भी प्रयोग मिलता है । १२ बसीवारे हो कान्हा मोरी रे गागरी उतार । गगरी उतार मेरो तिलक सभार । यमुना के नीरे तीरे बरसीलो मेह, छोटे से कन्हैया जी सू लागो म्हाँरो नेह । वृन्दाबन मे गऊएँ चरावे, तोर लियो गरवा को हार । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, तोरे गई बलिहार ॥५२१॥† पदाभिव्यक्ति मे संगति नही है । उपर्युक्त पद की शैली का चन्द्रसखी के पदो की शैली से बहुत साम्य है । १६