मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह १३ तो सो लाग्यो नेहरा, प्यारे नागर नंद कुमार । मुरली तेरी मन हर्यो, विसर्यो घर व्यवहार । जब ते श्रवननि धुनि परी, घर आगण न सुहावै । पारधि ज्यूँ चूकै नही, मृगी बेधि दई आय । पानी पीर न जानई ज्यों, मीन तडफि मरि जाय । रसिक मधुप के मरण को, नहि समझत कमल सुझाव । दीपक को जो दया नही, समझत उडि उडि मरत पतग । मीराँ प्रभु गिरिधर मिले, जैसे पानी मिलि गयो रंग ॥५२२॥† उपर्युक्त पद की प्रथम पंक्ति का निम्नांकित पाठान्तर प्राप्त है - “तू नागर नन्दकुमार, तों सो लाग्यो नेहरा ।” १४ गाव राग कल्याण, मोहन गावे राग कल्याण । आप गावे ने आप बजावे, मोरली सुँ मिलावे तान । मोर पछी सिर मुकुट-बिराजे, कुण्डल झलके कान । मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर नागर, गोपियें तजियो ध्यान । ॥५२३॥† १५ गौड़ी तो अब मिट गई, जब अस्त भयो है भाण । रात घटिका हो गई जब, प्रकट्यो राग कल्याण । कल्याण कल्याण सब को कहै, मै क्या कहूँ कल्याण । जा घेर सेवा श्याम की, ता घेर सदा कल्याण । अगो अंग की उलट भयो, जब प्रकट्यो राग कल्याण । कल्याण राग सो महाबली, सब राग को राखत मान । सिंघल देश की पद्मिनी, जपती राग कल्याण ॥५२४॥†