मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनाथ-प्रभाव द्योतक पद ३०३ ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ जोगिया मेरे तेरी । मनसा वाचा करमणा, प्रभु, पुरवौ मेरी । मै पतिवरत पीव की, हो मोल लयी चेरी । तुम बिन कोई दूजो देवा, सुपनै नहि हेरीं । माता पिता सुत बधु द्वारा, औँ पाँव मे बेरी । तुम बिन कोऊ नाही मेरो, प्रगट कहूँ टेरी । एक बिरियाँ१ मेरे नगर, दे जावो फेरी । मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, राखो चरण मेरी ॥५४८॥ २ जोगिया री सूरत मन मे बसी । नित प्रति ध्यान धरत हूँ दिल मे, निसि दिन होत कुसी । कहा करूँ, कित जाऊँ मोरी सजनी, मानो सरप डसी । मीराँ कहै प्रभु कबर मिलोगे, प्रीति रसीली बसी ॥५४९॥ ३ जोगिया जी, तू कब रे मिलोगे आई । तेरे ही कारण जोग लियो है, घर घर अलख जगाई । दिवस न भूख, रैण नही निद्रा, तुम बिन कछु न सुहाई । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, मिल कर तपत बुझाई ॥५५०॥ ४ जोगिया से प्रीत किया दुख होई । प्रीत कियाँ सुख न मोरी सजनी, जोगी मीत न कोई । राति दिवस कल नाहि परत है, तुम मिलिया बिन मोइ । १ बार।