मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ मै तो चरण लगी गोपाल ११६ ७४ २ आली री मोरे नैनन बान पडी ११७ ,, ३ माई, मेरे नैनन बान पडी री ११८ , ४ नैन परि गई ऐसी बानि • . ११९ ७५ ५ नैणा री हो पड गई बाण १२० " ६ जब कें तुम बिछुडे प्रभु जी, कबहूँ न पायो चैन १२१ " ७ मै जाण्यो नहि प्रभु को मिलन कैसे होय री १२२ ७६ ८ सखी मोरी नीद नसानी हो १२३ ७७ ९ पलक न लागै मेरी स्याम बिन १२४ ,, १० नीद नही आवे जी सारी रात १२५ * ११ मैं विरहणी बैठी जागूँ, जगत सब सोवै री आली १२६ ७८ १२ दरस बिन दूखन लागै नैण १२७ ,, १३ जोहने गोपाल फिरूँ, ऐसी आवत मन मे १२८ ,, १४ हो गये श्याम दुइज के चन्दा १२९ ७९ १५ कान्हा तेरी रे जोवत रह गई बाट १३० ,, १६ अँखिया कृष्ण मिलन की प्यासी . १३१ ,, १७ मन हमारा बाँध्यो माई, कँवल नैन अपने गुन १३२ ८० १८ बिरहनी बावरी सी भई १३३ ,, १९ हरि तुम काय कूं प्रीति लगाई १३४ ८१ २० पिया इतनी बिनती सुनो मोरी, कोई कहियो रे जाय १३५ ,, २१ देखो साइयाँ, हरि मन काठ कियो १३६ ,, २२ पिया कूं बता दे मेरे, तेरे गुण मानूंगी १३७ " २३ पियाजी, थे तो कटारी मारी १३८ ८२ २४ सोवत ही पलको मे, मै तो पलक लागी पलमे पिऊ आये १३९ ,, २५ स्याम को संदेशो आयो, पतियाँ लिखाय माय १४० ,, २६ मेरे प्रीतम राम कूं लिख भेजूँ री पाती १४१ ८३ २७ मतवारो बांदल आए रे, हरि को संदेशो कछु नही लाए रे १४२ ,, २८ बादल देखि झरी हो श्याम, बादल देखि झरी १४३ ,, २९ सावण दे रह्यो जोरा रे, घर आवो हो स्याम मोरा रे १४४ ८४ ३० बरसे बदरिया सावन की, सावन की मन भावन की १४५ ,, ३१ सुनी हो मै हरि आवन की आवाज १४६ ,, ३२ कोई कहियो रे प्रभु आवन की १४७ . ८५