भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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मतभेद राजस्थानी में प्राप्त पद १ तू मत बरजै माई री, साधाँ दरसन जाती । राम नाम हिरदै बसै, माहिले मदमाती । माई कहै सुन धीहड़ी, काहे गुण फूली । लोक सोवै सुख नीदड़ली, थे कथूँ रैणज भूली । गेली दुनियाँ बावली, ज्याँकूँ राम न भावै । ज्याँ रे हिरदै हरि बसै, त्याँ कूँ नीद न आवै । चौबास्याँ की बावड़ी, ज्याँ कूँ नीर न पीजै । हरि नारे अमृत झरै, ज्याँ की आस करीजै । रूप सुरगा राम जी, मुख निरखत जीजै । मीराँ व्याकुल विरहणी, अपनी कर लीजै ॥१॥† उपर्युक्त पद मे "माहिले" के स्थान मे "म्हाँरे" होना युक्तियुक्त है, क्योकि "माहिले" जैसा कोई शब्द हिन्दी या राजस्थानी मे नही है । २ मीराँ . माई, म्हाँने सुपणे मे परण गया जगदीस । सोती को सुपणा आविया जी, सुपणा बिस्वाबीस¹ । माँ गेली² दीखे मीरा बावली, सुपणा आल जंजाल । मीराँ माई, म्हाँने सुपणे मे, परण गया गोपाल । १ शुभ, २ पागल,