मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ मीराँ-वृहद्-पद संग्रह अंग अंग हल्दी मै करी जी, सूधे भीज्यो गात । माई, म्हाँने सुपणे मे परण गया दीनानाथ । छप्पन कोटि जहाँ जाण¹ पधारे, दुलूहा श्री भगवान । सुपणे में तोरण² बाँधियो जी, सुपणे मे आयी जाण । मीराँ को गिरधर मिल्यां जी, पूर्व जनम के भाग । सुपणे मे म्हाँने परण गया जी, हो गया अचल सुहाग ॥२॥† पाठान्तर--१ माई म्हाँने सुपना मे परणी गोपाल । गैली ये मीराँ भई बावरी, सपनू छै आल जंजाल । जो तू ने सपना मे गिरधर मिलिया, तो कछुक सैनाण बताय । हल्दी तो पीठी म्हाँरे̂ अग लिपटाई, मँहदी सूँ राच्या म्हाँरा हाथ। छप्पन कोड जाटू जान-पधारिया, दूल्हो श्री भगवान । साँवरियो सिर पेच कलगी, सोरठणी तलवार । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, पूरबले भरतार ।† पाठान्तर--२ माई, री म्हाँने सुपणे में परणी गोपाल । राती पीरी चूनर पहरी, महदी पान रसाल । कॉई करों और संग भाँवर, म्हाँने जग जंजाल । मीराँ प्रभु गिरधरन लाल सूँ , करी सगाई हाल ।† पाठान्तर--३ माई, मै तो सपना मे परणी गोपाल । हाथी भी लायो घोडा भी लायो और लायो सुखपाल ।† १ बारात, ̂ २ लकडी का बनाया हुआ एक चित्रित त्रिकोण जो बारात के समय पर लडकी के पिता के दरवाजे पर बाँध दिया जाता है। नियमानुसार दुलहा नीम की छड़ी से इसको छू देता है, तंब अन्य रस्में की जाती हैं।