मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमतभेद पाठान्तर--४ माई हूँ सुपणे मे परणी गोपाल। मति करो म्हारी ब्याव सगाई, क्यूँ बाँधो जजाल। झूठा मात पिता बधु, बध्यो अबध्या ख्याल। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, साँचो पति नन्दलाल।† उपर्युक्त दोनो पदो की प्रामाणिकता संदिग्ध है। मीराँ की छोटी बयस मे ही मीराँ की माता का निधन हो गया था, यही अद्यावधि सर्वमान्य है। भाषा पर भी आधुनिक राजस्थानी का प्रभाव स्पष्ट है। ३ कूड़ो वर कुण परणीजे माय, परणूं तो मर मर जाय। लख चौरासी को चूडलो रे बाला, पहर्यो कितीयक बार। कै तो जीव जानत है सजनी, कै जाने सिरजणहार। सात बरस की मै राम आरध्यौ, जब पाया करतार। मीराँ ने परमातम मिलीया, भव भव का भरतार॥३॥† यह पद श्री भटनागर जी द्वारा प्राप्त हुआ है। पदाभिव्यक्ति मे अर्थ संगति नही है। अत पद को प्रक्षिप्त कहा जा सकता है। ४ म्हाँने गुरू गोविन्द री आण, गोरल ना पूजॉ। और जो पूजो गोरज्या जी, थे क्यूँ न पूजो गोर। मन बाँछत फल पावस्यो जी, थे क्यूँ पूजो और। नहि हम पूजॉ गोरज्याँ जी, नहि पूजॉ अनदेव। बाल सनेही गोविन्दो, साध सता को काम। थे बेटी राठोडाँ की, थॉने राज दियो भगवान। राज करे ज्यॉने करने दीज्यो, मै भगता री दास।