मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह सेवा साधू जनन की, म्हाँरे राम मिलण की आस। लाजै पीहर सासरो, माइतणौ मौसाल। सब ही लाजै मेडतिया जी, थाँसू बुरा कहै ससार। चोरी करूँ न मारगी¹, नहि मै करूँ अकाज। पुन्न के मारग चालताँ, झक मारो ससार। नहि मै पीहर सासरे, नहि मै पिया जी की साथ। मीराँ ने गोविन्द मिलिया जी, गुरू मिलया रैदास ॥४॥ पाठान्तर—१ साधो रो सग निवारो राईं², भाभी जी गोरल पूजो जी राज। साइयाँ³ पूजे गोर ने थे पूजो गणगोर, मन बाँछत फल पावस्यौ। भाभी जी रुठे गणगोर। नै पूजूं गणगौर नै नहि पूजूँ अनदेव, बाल सामरो जाको थे नहि जानो भेव। सेवा सालगराम की साध संता रो काम, थे, बेटी राठौड की, थाँने राज दियो भगवान। राज करे ज्याँने करन द्यो, मै सन्तां की दास। भगति करौ भगवान की, म्हाँरे राम मिलण की आस। लाजै पीहर सासरो, लाजै या मोसार, नितराँ⁴ आवै ओलमा, थाने बुरा कहै संसार। चोरी न करूँ कुमारगी, नहि कुमाऊं पाप, पुन रे मारग चालता, म्हांसू कांई हठ लाग्या छो आप। कदि⁵ ठाकुर परचो⁶ दियो, कदि मानी परतीति। कुल को नातो तोडियो, भाभी जी नहि छै राजां की रीति। नहि जाऊं पीहर सासरे, नहि पिया के पास। मीराँ सरणै राम के, म्हांने गुरू मिलिया रैदास। १ कुमार्गी होना, २ राजा, ३ सखियाँ, ४ नित्यप्रति, ५ कब, ६ प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाना,