मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८ मीराँ बृहद्-पद-संग्रह
तोरण आया राणा राजई सजनी म्हारी हे । कामिण¹ कलस सँवारि पिय म्हांरो गिरधारी । फेराँ² तो आया राणा राजई सजनी म्हांरी हे । एक मीराँ की मीराँ दोय पिय म्हारी गिरधारी । परण पधारियो राणा रांजई सजनी म्हारी हे । पहुंच्यो गढ चितौर पिय म्हारो गिरधारी । महला पधार्यो राणा राजई सजनी म्हारी हे । एक मीराँ की चार मीराँ पिया म्हारो गिरधारी । सछा उरे बुलाय कै सजनी म्हारी हे । मीराँ कू समझाय, पिय म्हारो गिरधारी । समझाये समझे नहि सजनी म्हारी हे । बजर सिला विष बाट पिय म्हारो गिरधारी । बजर सिला बिख बांटियो सजनी म्हारी हे । पर फेटा बीच छानि पिय म्हारो गिरधारी । •पर फेटा बीच छानियो सजनी म्हांरी हे । देवो मीराँ जी को जाय पिय म्हांरो गिरधारी । चरनोदक आरोग्यो³ सजनी म्हारी हे । दूनो बढयौ छै सनेस⁴ पिय म्हांरो गिरधारी । पगा जू बाधे घूघरा, सजनी म्हांरी हे । गावै छै गुंन गोविन्द पिय म्हांरो गिरधारी । पटका⁵ खोल पगां पर्यौ सजनी म्हांरी हे । अपनो गुरुजी बताय पिय म्हांरो गिरधारी । म्हांरो गुरु रैदास है सजनी म्हारी हे । पढे सुने फल होय पिय म्हारो गिरधारी ॥५॥ लगभग एक ही भावना को व्यक्त करने वाले उपर्युक्त दोनो ही पद विशेष ध्यान देने योग्य है। पहले पद से यह स्पष्ट नही होता कि
१ घर मे काम करने वाले नौकर, २ भाँवरें, ३ खा लिया, ४ स्नेह, ५ दरवाजा।