मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमतभेद १७ हुआ, जब कि भोजराज के सौतेले छोटे भाई राज्याधिकारी बने। उपर्युक्त पद के आधार पर मीराँ का संघर्ष भोजराज की जीवित- अवस्था मे ही प्रारम्भ हो जाता है और वह भी कृष्ण की आराधना हेतु नही अपितु इसलिये कि “नितप्रति उठि नीच घर जाओ” और “नाचो दे दे तारी”। अन्तिम पंक्ति मे वर्णित यह “सदगुरू” भी अब तक एक रहस्य ही बने हुए है। सम्भव है कि “सदगुरू” कौन थे, यह जान लेने पर मीराँ के जीवन वृतान्त पर गहरा प्रकाश पड सकेगा। १७ नहि भावै थारो देसडलो रग रूडो¹। थारे देसा मे राणा साध नही छै, लोग बसै सब कूड़ो। गहना गाठी राणा हम सब त्याग्या, त्याग्या कर रो चूड़ो। काजल टीकी हम सब त्याग्या, त्याग्या बाधन जूड़ो। मेवा मिसरी मै सब त्याग्या, त्याग्या छै सक्कर बुरो। तन की आस कबहु नहि कीनी, ज्यूँ रण माही सूरो। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, वर पायो मै पूरो ॥१७॥ पाठान्तर १, नहि भावै थारो देसड़लो जी रूडो रूडो। हरि की भगति करै नही कोई, लोग बसै सब कूडो। पाटी माग उतारि धरूंगी, न पहिरू कर चूड़ो। मीराँ हठीली कह सतन सो, वर पायो छै पूरो। पाठान्तर २, राणा जी थारो देसडलो रग रूडो। थारे मुलक मे भक्ति नहि छै, लोग बसे सब कूड़े। १ रंगो से भरा सजा हुआ सुन्दर। २