भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह पाट पटम्बर सब ही मै त्यागा, तज दियो कर रो चूडो । मेवा मिसरी मै सब ही त्यागा, त्यागा छै सक्कर बुरो । तन की मै आस कबहू नहि कीनी, ज्यूँ रण माहि सूरो । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, वर पायो छै पूरो । पाठान्तर ३, राणा जी थारो देस्ड़लो छै रग रूड़ो । राम नाम की भक्ति न भावै, लोग बसै सब कूड़ो । मेवा मिठाई मीरा सब ही त्यागे, त्याग्यो छै सान और बुरो । गहणो तो गाठो मीरा सब ही त्याग्यो, त्याग्यो छै बैया रो चूड़ो । साल दुसाला मीरा सब सोई त्याग्या, सिर पर बांध्यो छै जूडो । मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, बर पायो छै मीरा रूडो । पाठान्तर ४, देसडलो रूड़ो रूडो, राणा जी थांरो देसडलो । भगत न भावै म्हारा राम की, लोग बसै सब छै कूड़ो । मेवा मिसरी सब ही त्याग्या, त्याग दियो छै बुरो । तन की आस कबहू नहि कीनी, ज्यूँ रण माहि सूरो । भाई मात कुटुम्बी त्याग्यो, त्याग दियो छै चूडो । घूँघट को पटि दूर कियो, सरि बाध्यौ छै जूड़ो । यो ससार भव दुख को सागर, मै हाकीयौ दूरो । मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, वर पायो छै पूरो । यह पाठ भटनागर जी द्वारा किसी दादू पथी सत के सग्रह से प्राप्त हुआ । १८ राणौ जी मेवाडो म्हांरे दाय न आवै । गिरधर मो मर्न भाया भोलि माय ।