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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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मतभेद १९ राणा जी म्हारू रूस रह्यो है, कडा वचन सुनाय भोली माय। गुरू कृपा सूं सत पधार्या, सता स्याम मिलाय भोली माय। बाधि घूघरा नृत्य करू म्हे, हरि गुण गाय रिझावा भोली माय। मीराँ के प्रभु आस पराई, गिरिधर सेजाँ आया भोली माय ॥१८॥† पद की प्रथम पंक्ति की अभिव्यक्ति पद स० १७ की अभिव्यक्ति से मिलती है। परन्तु शेष पदाभिव्यक्ति संर्वथा विभिन्न पडती है। पदाभिव्यक्ति मे सगति का भी अभाव है। “भोली माय” जैसा सम्बोधन पद की हर पंक्ति मे प्रयुक्त हुआ है जो विशेप विचारणीय है। १९ अब नहि मानूँ राणा थारी, मै बर पायो गिरधारी। मनि कपूर की एक गति है, कोऊ कहो हजारी। ककर कचन एक गति है, गुंज मिरच इकसारि। अनड घणी को सरणो लीनो, हाथ सुमिरंनी धारी। जोग लियो जब क्या दलगीरी, गुरू पाया निज भारा। साधू संगत मह दिल राजी, भइ कुटुम्ब सूं न्यारी। क्रोड बार समझाओ मोकूँ, चालूँगी बुद्धि हमारी। रतन जडित की टोपी सिर पै, हार कठ को भारा। चरन घूघरू घमस पडत है, म्हे करा स्याम सूं यारी। लाज सरम सब ही मै हारी, यौ तन चरण अधारी। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, झक मारो संसारी ॥१९॥†