मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह पाठान्तर १, अब नहि मानाला म्हे थारी,म्हाने बर मिलि गिरधारी । मन कपूर की एक ही गति है, कहा कहू बार हजारी । ककर कचन एक गिणत है, गुज मिरच एक सारी । अनन्त धणी के सरणे आई, हाथ सुमिरणी धारी । जोग लियो जब बाद तजी री, गुर पाया निज भारी । साध सगत मेरो मंन राजी, भई कुटूब सू न्यारी । क्रोड बार समझावों मोकू, चालूगी बुद्धि हमारी । म्हे राणा के परत¹ न रहस्या, कई बार कह कह हारी । सौ बातन की एक बात है, अब तो समझ गवारी । रतन जडित की टोपी सिर पर, हार कठ को भारी । चरण घूंघरा घमस पडत है, “म्हे” कराँ स्याम सू न्यारी । लाज सरम तो सभी गुमाई, यो तन चरणा धारी । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरण कमल बलिहारी ।† उपर्युक्त पद निम्नांकित अन्तर के साथ भी पाया जाता है । १ अतिभारी । २. जब बाद तजी री । ३ में भई स्याम की प्यारी । पाठान्तर २, अब तो नही म्हैं थांरी म्हांने, वर मिलिया गिरधारी । मन कपूर की एक ही गति है, कहा कहूं बार हजारी । ककर कंचन एक गिणत है, गुज मिरच इकंसारी । अनन्त धणी के सरणे आई, हाथ सुमिरणी धारी । जोग लियो जब सब ही त्याग्यो, गुरु पाया निज भारी । साध संगत मेरो दिल राजी, भई कुटुंब सू न्यारी । कोटि बेर समझावो मोकूं, चालूगी बुद्धि हमारी । म्हैं राणा के परत न जावा, केईं बेर कह हारी । १ लौट कर ।