मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह पाठान्तर १, याहीं बदनामी मीठी हो, राणा जी, याही वदनामी मीठी। रावली ड्योढया म्हाने सतगुरु मिलिया,किस बिध फिरूगी अपूठी। सत सगति मे ग्यान सुणै छी, दुरजन लोगा मोहि दीठी। यो मून मेरो हरि मे बसियो, जैसे रंग मजीठी। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, दुरजन जलो ज्यूँ अगीठी। पाठान्तरपुर २, राणा जी म्हाने याही बदनामी मीठी । साकडली सेरयां जन मिलिया, क्यू कर फिरू अपूठी। राम जी सू मे तो बात करै छी, दुरजन लोगा ने दीठी। बुरा जी कहो नै कोई,भला जी कहो नै,नै आनो किस की बसीठी। जन मीराँ के है निन्दक प्राणी, जल बलि होई अगीठी । † पाठान्तर ३, राणा जी मुझे यह बदनामी लगे मीठी। कोई निन्दो कोई बिन्दो, मै चलूगी चाल अपूठी। साकली गली मे सतगुरु मिलिया, क्यू कर फिरूं अपूठी। सतगुरु जी सू बातज करता, दुरजन लोगा ने दीठी। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, दुरजन जलो जा अंगीठी।† इस पाठ की प्रथम दो पक्तियों पर भाषा की दृष्टि से आधुनिक प्रभाव हे। प्रभाव हे। पाठान्तर ४, राणा जी म्हाने या बदनामी लागे मीठी। थे तो राणा जी राजकवर छो, म्हे राठोडा री बेटी। भलाई कहो म्हांने बुराई कहौ जी, नही माना रे किसी की।