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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह मिश्रित भाषा में प्राप्त पद १ राणा जी ! अब न रहूगी तोरी हटकी । साध-संग मोहि प्यारा लागै, लाज गई घूँघट की । पीहर मेडता छोड़ा आपणा, सुरत निरत दोऊ चटकी । सतगुरु मुकुर दिखाया घट का, नाचूंगी दे दे चुटकी । हार सिगार सभी ल्यौ अपना, चूडी कर की पटकी । मेरा सुहाग अब मोकूँ दरसा, और न जाने घट की । महल किला राणा मोहि न चाहिये, सारी रेशम पट की । हुई दिवानी मीराँ डोलै, केस लटा सब छिटकी ॥२३॥ पाठान्तर १, अंब न रहूगी अटकी, मन लाग्यो गिरधर से । माणक मोती परत न पहिरू, में तो कब की नटकी । गहणे म्हारे माला कंठी, और चनण की कुटकी । राजपणा की रीत गुमाई, साधा रे संग भटकी । जेठ भऊ की लाज न राखी, घूँघट परै जो पटकी । म्हाने गुरू मिलिया अविनासी, दई ज्ञान की गुटकी । नित प्रति उठि जाऊं गुरू दरसण, नाचूँ दै दे चुटकी । लागी चोट निज नाम धणी की, म्हांरे हिवड़े खटकी । परम गुरू के सरणै जाऊ, करू प्रणाम सिर लंटकी । साधा के सग करम लिखायो, हर सागर मे लटकी । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, जनम मरण से छुटकी । † उपर्युक्त पाठ के प्राय. सभी क्रिया पद खड़ी बोली मे है ।