मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह २ बरजी नाही रहूगी, म्हारो स्याम सुंदर भरतार। इक बार बरजी, दोय बार बरजी, बरजी सो सो बार। सासू बरजी ननदी बरजी, राणो जी दावदार। मीराँ के प्रभु अविनासी, पूरण ब्रह्म अपार। ॥२५॥ पद की तीसरी पंक्ति का उत्तरार्द्ध विचारणीय है। "राणो जी 'दावदारा'' संकेत किस ओर है ? राणा पद के दावेदार कुंवर पाटवी या दबदबेदार "रोबीले व्यक्तित्व वाले" राणा स्वयं, दोनो ही तरफ इसको घटाया जा सकता है। इतिहास और मान्यताएं भी दुविधा- जनक ही हैं। अतः उस आधार पर भी निर्णय नहीं किया जा सकता। ३ काहू की मै बरजी नाही रहू। जौ कोई मोकूँ एक कहै, मै एक की लाख कहू। सास की जाइ मेरी ननद हठीली, यह दुख किन से कहू। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, जग उपाहस सहू ॥२६॥† पदाभिव्यक्ति में असंगति है। साथ ही मीराँ जैसी भक्तिमती नारी द्वारा ऐसी छोटी वृत्तियों का वर्णन, वह भी गृह त्याग के बाद असम्भव ही प्रतीत होता है। पद की शुद्ध ब्रजभाषा को देखते हुए ऐसा ही प्रतीत होता है कि वृन्दावन पहुंचने पर ही ऐसे पदों की रचना हुई होगी। पाठान्तर १, मेरो मन लाग्यो सखी सांवरिया सो, काहू की बरजी नाहि रहोंगी। जो कोऊ मोको एक कहेगो, एक कीं लाख कहोंगी।