मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८ मीराँ-बृहद-पद-संग्रह काँढि कलेजा मै धरू रे, कौवा तू ले जाइ। ज्या देसा म्हारो पिव बसै, (सजनी) वे देखे तू खाड। म्हारो नातो नाव को रे, और न नातो कोड। मीराँ व्याकुल विरहणी रे, पिया दरसण दीजो मोड। ११ तै दरद नहि जान्यू, सुनि रै वैद अनारी। तू जा वैद घरि आपणै रे, तुझै खबर मोरी नाही। मोरे दरद को तू मरम नहि जाणै, करक कलेजा रे माही। 'प्राण जाण का सोच नहि मोहि, नाथ दरस द्यौ आरी¹। तुम दरसन बिन जिव यूँ तरसै, ज्यूँ जल बिन पनवारी। कहा कहू कछु कहत न आवै, सुणिज्यो आप मुरारी। मीराँ के प्रभु कबरे मिलोगे, जनम जनम की मै थारी ॥३९॥† भाषा और भाव दोनो ही के आधार पर यह पद पद स० १० की कुछ पक्तियो का गेय रूपान्तर ही सिद्ध होता है। पद के इस रूप मे पूर्वापर सम्बन्ध का भी अभाव है। इससे उपर्युक्त कथन का समर्थन ही होता है। १२ रमैया बिन मोसूँ रह्योइ न जाय। खान पान मोहि फीको सो लागै, नैणाँ रहै मुरझाइ। बार बार मै अरज करत हूँ, रैण गई दिन जाइ। मीराँ कहै प्रभु तुम मिलिया बिन, तरस तरस तन जाइ ॥४०॥ १ शीघ्र ।