भारतकोश
मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

मेघदूतम् (वैद्यनाथ झा शास्त्री हिन्दी टीका सहित)

Meghadutam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Meghadutam with Sanskrit text and Hindi Commentary by Pt. Vaidyanath Jha Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

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२७८ मेघदूतम्

टिप्पणी—अभिज्ञानदानात्—यहाँ 'हेतौ' इस सूत्र से पञ्चमी हुई है। 'अभिज्ञान' का अर्थ है चिह्न, जिसे बोलचाल की भाषा में 'निशानी' कहते हैं। महाकवि ने इस अभिज्ञान का प्रयोग अपने अन्य कृतियों में भी किया है। जैसे 'शकुन्तला नाटक' का पूर्ण नाम ही 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' है, उसमें राजा दुष्यन्त 'शकुन्तला' को अपना अभिज्ञान स्वनामाङ्कित 'अँगूठी' देते हैं, जो उस नाटक के नामकरण का मुख्य आधार है। इसी तरह 'विक्रमोर्वशीय' में भी 'संगम-मणि' अभिज्ञान रूप ही है। इसी तरह 'मालविकाग्निमित्र' में भी सर्पचिह्न से चिह्नित मुद्रिका अभिज्ञान रूप में आती है। इसी तरह यहाँ भी यक्ष 'निद्रां गत्वा' आदि अभिज्ञान मेघ की सच्चाई एवं अपनी कुशलता की जानकारी के लिए देता है। कुशलिनम्—कुशलमस्यास्तीति कुशली, यहाँ 'कुशल' शब्द से 'अत इनिठनौ' इस सूत्र से 'इन्' प्रत्यय हुआ है। कौलीनात्—कुले (जनसमूहे) भवः=कुलीनः 'कुल' शब्द से 'कुलात्खः' इससे 'ख' प्रत्यय होता है, और 'आयनेयीनीयियः' इत्यादि सूत्र से 'ख' के स्थान पर 'ईन' आदेश करके 'कुलीन' शब्द बनता है। पश्चात् 'कुलीनस्य भावः' या 'कुलीनस्य कर्म' किसी भी विग्रह में 'हायनान्त-युवादिभ्योऽण्' इस सूत्र से 'अण्' प्रत्यय करके आदिवृद्धि करके 'कौलीन' ऐसा रूप बनता है। तस्मात् कौलीनात्। यहाँ महामहोपाध्याय मल्लिनाथ जी ने 'कुले जनसमूहे भवात् कौलीनात्=लोकप्रवादात्' लिखा है, जो कि उनकी न्यूनता कही जायेगी, क्योंकि उन्होंने प्रकृति प्रत्ययादि का निर्देश नहीं किया है। 'अस्तु', 'कौलीन' का अर्थ लोकापवाद होता है, जो दो प्रकार का होता है—( १ ) सामान्य और ( २ ) विशेष। मल्लिनाथजी ने सम्भवतः 'कुशलिनं मां विदित्वा' इस पूर्व पङ्क्ति को आधार मानकर यहाँ सामान्य लोकापवाद का ही ग्रहण किया है कि 'यदि तुम्हारे पति (यक्ष) जीवित होते तो तुम्हारे पास अवश्य आ गये होते' इसलिए यक्ष कहता है—हे प्रिये मुझे कुशल समझकर मेरे विषय में विश्वास मत छोड़ दो, मैं जीवित हूँ। सम्भवतः इसीलिए यक्ष अपने हर एक सन्देश-पद्य में अपनी प्रिया के लिए, अविघवे !, सुभगे, आदि का प्रयोग करके यह प्रदर्शित