भारतकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 501, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 501

सप्तमोऽङ्कः ४१३

**विदूषकः--**भो ! इमं असक्कार-रमणोअं सिलाअलं उपविसदु भवं !
(भोः ! इदमसंस्काररमणीयं शिलातलमुपविशतु भवान् ।)
चारुदत्त:-- ( उपविश्य ) वयस्य ! चिरयति वर्द्धमानकः ।
विदूषकः-- भणिदो मए 'वढ्ढमाणओ ! वसन्तसेणं गेण्हिअ लहुं लहुं आअच्छ' त्ति । ( भणितो मया-'वर्द्धमानक ! वसन्तसेनां गृहीत्वा लघु लघु आगच्छ' इति )
चारुदत्त:-- तत् किं चिरयति ? ।

किं यात्यस्य पुरः शनैः प्रवहणं तस्यान्तरं मार्गते ?
भग्नेऽक्षे परिवर्तनं प्रकुरुते ? छिन्नोऽथवा प्रग्रहः ?
वर्त्मन्तोज्झित-दारु-वारित-गतिर्मार्गान्तरं याचते ?
स्वैरं प्रेरितगोयुगः किमथवा स्वच्छन्दमागच्छति ? ॥ २ ॥


राजा के पुरुष कर वसूल रहे हैं। यहाँ वृक्ष, पुष्प और भौंरे उक्त तीन कार्य सम्पादित कर रहे हैं ॥ १ ॥

**शब्दार्थ--**असंस्काररमणीयम् = स्वभावतः मनोहारी, शिलातलम्=चट्टान का आसन, चिरयति=देर कर रहा है, लघु-लघु=जल्दी जल्दी ।

**अर्थ--विदूषक--**हे मित्र ! स्वभावतः मनोहारी इस शिलातल पर आप बैठिये ।

चारुदत्त-- ( बैठकर ) मित्र ! वर्द्धमानक देर कर रहा है !

**विदूषक--**मैंने तो यह कहा था--वर्धमानक वसन्तसेना को लेकर जल्दी-जल्दी ही आना ।'

**अन्वयः--**किम्, अस्य, पुरः, प्रवहणम्, शनैः, याति, तस्य, अन्तरम्, मार्गते ? अथवा, अक्षे, भग्ने, [ सति, तस्य ] परिवर्तनम्, कुरुते, अथवा, प्रग्रहः, छिन्नः, अथवा, वर्त्मान्तोन्झितदारुवारितगतिः, [ सन् ], मार्गान्तरम्, याचते, अथवा, स्वैरम्, प्रेरितगोयुगः, स्वच्छन्दम्, आगच्छति, किम् ? ॥ २ ॥

शब्दार्थ--किम् = क्या, अस्य=इस ( वर्धमानक की गाड़ी ) के, पुरः=आगे, प्रवहणम्=दूसरी गाड़ी, शनैः=धीरे-धीरे, याति=जा रही है, तस्य=उस गाड़ी का, अन्तरम्=अवकाश, खाली स्थान, मार्गते=ढूंढ़ रहा है ? अथवा, अक्षे=धुरा के, भग्ने=टूट जाने पर, [ तस्य=उसका ] परिवर्तनम्=बदलना, कुरुते=कर रहा है ? अथवा, प्रग्रहः=बैलों को नियन्त्रित करने की रस्सी, छिन्नः=टूट गयी है ? अथवा वर्त्मान्तोन्झितदारुवारितगतिः=रास्ते के बीच में रखी गयी लकड़ी [ कटे हुये वृक्ष आदि ] से रोक दिया गया है गमन जिसका ऐसा वह, मार्गान्तरम्=दूसरी रास्ता, याचते=प्रार्थना कर रहा है ? अथवा, स्वैरम्=धीरे-धीरे, प्रेरितगोयुगः=