मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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वस्तुवादिता स्पष्ट होती है । वस्तु, नेता तथा रस की दृष्टि से उत्तम कोटि का यह 'प्रकरण' समाज के वास्तविक दर्पण का भी कार्य करता है, अतः शूद्रक को सर्वश्रेष्ठ वस्तुवादी सामाजिक नाट्यकार का सम्मान अवश्य प्राप्य है ।
हमारे सहयोगी डॉ० जयशङ्कर लाल त्रिपाठी ने इस प्रकरण का रंगीन संस्करण प्रस्तुत कर प्रशंसनीय कार्य किया है । देशी तथा विदेशी कई विद्वानों ने इसके संस्करण तथा अनुवाद प्रस्तुत किये हैं । उनको ध्यान में रखते हुए ही विद्वान् संपादक ने इस प्रकरण का नया अनुवाद तथा समीक्षात्मक व्याख्यान प्रस्तुत किया है । संपादक-व्याख्याकार डॉ० त्रिपाठी ने रसिक विद्वान् तथा जिज्ञासु छात्र दोनों को ध्यान में रखा है और इसी का सुपरिणाम यह हुआ कि मृच्छकटिक संबन्धी कोई भी ऐसा प्रश्न इसमें छूटा नहीं है, जो जिज्ञासा का विषय हो । विवरणात्मक अनुवाद के साथ-साथ व्याख्यात्मक विश्लेषण के होने से प्रस्तुत संस्करण नितान्त उपयोगी बन गया है । प्रस्तुत संस्करण के प्रत्येक वैशिष्ट्य को अलग-अलग न गिनाते हुए मैं विद्वान् तथा विद्यार्थी दोनों से आग्रह करता हूँ कि वे इस संस्करण को अपनाकर स्वयं इसके उत्कर्ष का निरूपण करें । मैं अपनी ओर से डॉ० त्रिपाठी को इस सारस्वत श्रम के लिए धन्यवाद प्रदान करता हूँ ।
\—विश्वनाथ भट्टाचार्य