भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mudrarakshasam Natakam with Hindi Commentary

महाकवि विशाखदत्त द्वारा

DevanagariSanskritpublished488 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 488 में से

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पृष्ठ 166

प्रथमोऽङ्कः ६३

धिपसैन्यस्य, मध्यात्, प्रधानतमाः—अतिशयेन मुख्याः, पञ्च, राजानः—भूपाः, परया—उत्कृष्टया, सुहृत्तया—मित्रभावेण, राक्षसम्, अनुवर्तन्ते—अनुसरन्ति।

अन्वयः—कौलूतः चित्रवर्मा, नृसिंहो मलयनरपतिः सिंहनादः, काश्मीरः पुष्कराक्षः, क्षतरिपुमहिमा सैन्धवः सिन्धुषेणः, पृथुतुरगबलः पारसीकाधिराजः मेघाख्यः पञ्चमः, अस्मिन् अहं ध्रुवम् अधुना एषां नामानि लिखामि, चित्रगुप्तः प्रमार्ष्टु ॥२०॥

व्याख्या—कौलूतः—कुलूतदेशाधिपः, चित्रवर्मा नाम, नृसिंहः—नरश्रेष्ठः मलयनरपतिः—मलयगिरिसमीपवर्तिदेशाधिपः, सिंहनादो नाम, काश्मीरः—कश्मीरदेशाधिपः, पुष्कराक्षो नाम, क्षतरिपुमहिमा—क्षतः विनाशितः रिपूणाम् अरीणां महिमा प्रभावः येन तादृशः, सैन्धवः—सिन्धुदेशाधिपतिः, सिन्धुषेणो नाम, पृथुतुरगबलः—प्रभूताश्वादिसैन्यः, पारसीकाधिराजः—पारसीकानां वनायु-देशोद्भवानाम् अधिराजः अधिपतिः, मेघाख्यो नाम पञ्चमः राजेति शेषः। अस्मिन्—भेदपत्रे, अहम्, ध्रुवम्—निश्चितम्, अधुना—सम्प्रति, एषां—पञ्चराज्ञां, नामानि, लिखामि, चित्रगुप्तः—यममन्त्री, प्रमार्ष्टु—क्षालयतु निजलेखपत्रात् उत्सारयतु इति यावत् ॥२०॥

हिन्दी अनुवादचाणक्य—यह (आभूषण का समाचार) पत्र का अन्तिम विषय होगा। प्रारंभ का विषय क्या हो? [सोचकर] अच्छा, समझ गया। जैसा कि गुप्तचरो से पता चला है कि म्लेच्छराज की सेना मे से पाँच प्रमुख राजा अत्यन्त मित्र भाव से राक्षस का अनुसरण कर रहे है। वे ये है—

कुलूत (कुल्लू) देश का राजा चित्रवर्मा, मनुष्यो मे श्रेष्ठ मलय-नरेश सिंह-नाद, काश्मीर का राजा पुष्कराक्ष, सिन्धुदेश का राजा सिन्धुषेण और विशाल अश्व-सेना से युक्त पारसीक देश का मेघ नामक राजा पाँचवाँ है। सम्प्रति मै इस (पत्र) में निश्चित रूप से इन (राजाओं) के नाम लिखता हूँ। चित्रगुप्त (अपने यहाँ जीवितों की सूची में इनके नामों को) मिटा दे ॥२०॥

टिप्पणीप्रणिधिभ्यः—गुप्तचरो से। अत्र अपादाने पञ्चमी। मध्यात्—अत्रापि अपादाने पञ्चमी। कौलूतः—कुलूतानां राजा इति कुलूत + अण् = कौलूतः। आधुनिक कुल्लू प्रदेश को कुलूत माना जाता है। नृसिंहः—श्रेष्ठ

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