भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mudrarakshasam Natakam with Hindi Commentary

महाकवि विशाखदत्त द्वारा

DevanagariSanskritpublished488 पृष्ठ

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२१० मुद्राराक्षसम्

प्रभूत. विवृद्ध. कोष धनराशि हस्तिन. गजा. अश्वाश्च घोटकाञ्च यस्मिन् तत् । सुमहत्-सुविपुलम्, ऐश्वर्यम्-सम्पत्, अवाप्य-प्राप्य, पुन -भूय, उच्छेद-शङ्कया-विनाशभिया, मलयकेतुम्, आश्रित । योऽयमपर, सेनापते -सेनाध्यक्षस्य, सिंहबलस्य, कनीयान् भ्राता-अनुज, भागुरायण., असावपि-सोऽपि, तत्र काले-मलयकेतुसामीप्यसमये, पर्वतकेन-मलयकेतुपित्रा, सह-साक, समुत्पन्नसौहार्द -समुत्पन्न सौहार्दं मैत्री यस्य तादृश, तत्प्रीत्या च-तस्य पर्वतकम्य प्रीत्या स्नेहेन च, ते-तव, पिता-जनक, चाणक्येन-कौटिल्येन, घातित -विनाशित, इति-इत्यम्, रहसि-एकान्ते, त्रासयित्वा-भाययित्वा, मलयकेतुम्, अपग्राहितवान्-अपसारितवान् । तत -तदनन्तरम्, भवदपथ्यकारिषु-त्वदनिष्टकारिषु, चन्दनदासप्रभृतिषु-चन्दनदासादिषु, निगृह्य-माणेषु-दण्ड्यमानेषु, स्वदोषशङ्कया-निजापराधभयेन, अपक्रम्य-इतो निर्गत्य, मलयकेतुम्, आश्रित । असौ-भागुरायण., मम-मे, प्राणरक्षक-जीवन-त्राता, इति, कृतज्ञताम्-प्रत्युपकारिताम्, अनुवर्तमाननेन-अपेक्षमाणेन, तेन-मलयकेतुना, ह्यपि, आत्मन.-स्वस्य, ह्यान्तरम्-अभ्यवहितम्, अमात्यपद-मन्त्रिपद, ग्राहित -प्रापितः । यौ तौ, लोहिताक्षविजयवर्माणौ-तदाख्यो जनौ, तौ अपि, अतिमानित्वात्-बहुभिमानवत्वात्, स्वदायादेभ्य-निजबन्धुभ्य, त्वया-भवता, दीयमान-वितीर्यमानम्, असहमानौ-अमृष्यमाणौ, मलयकेतुम् आश्रितौ । इति-इमे, एषाम्-भद्रभटप्रभृतीनाम्, अपरागहेतवः-विराग-कारणानि (वर्तन्ते) ।

हिन्दी अनुवादराजा—आर्य ! इन लोगो की विरक्ति के कारणों को सुनना चाहता हूँ ।

चाणक्य—वृषल ! सुनो । उनमें से ये जो गजसेनापति तथा अश्वसेनापति (क्रमश.) भद्रभट और पुरुषदत्त नाम के (व्यक्ति) हैं, ये दोनों स्त्री, मदिरा और शिकार में आसक्त होने के कारण हाथो-घोड़ो की देखभाल करने में असावधान रहते थे—इसलिए मैंने (इन्हें) अधिकारच्युत करके अपनी जीविका के निर्वाहमात्र पर रहने दिया । अतः विरक्ति से (ये दोनों शत्रु-पक्ष में) जाकर अपने-अपने अधिकार के अनुरूप कार्य पाकर मलयकेतु के आश्रित हो गए । ये जो हिङ्गुरात और बलगुप्त हैं, वे दोनों अत्यन्त लोभी स्वभाव के कारण (तुम्हारे) दिये हुए धन को थोडा समझते हुए 'वहां बहुत मिलेगा' ऐसा सोचकर मलयकेतु के आश्रय में