भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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पंचम अङ्क । ११६

मलयकेतु ।—( आप ही आप ) हां, जाना, जो हमारे नाश करने के हेतु चन्द्रगुप्त से मिले हैं वही हमको घेरे रहेंगे (प्रकाश) आर्य्य, अब कुसुमपुर से कोई आता है या वहां जाता है कि नहीं ? राक्षस ।—अब यहां किसी के आने जाने से क्या प्रयोजन । ५ पांच छः दिन मे हम लोग ही वहां पहुंचेगे । मलयकेतु ।—[ आप ही आप ] अभी सब खुल जाता है [ प्रगट ] जो यही बात है तो इस मनुष्य को चिट्ठी ले कर आप ने कुसुमपुर क्यों भेजा था ? राक्षस ।—[ देख कर ] अरे ! सिद्धार्थक है ? भद्र ! यह १० क्या ? सिद्धार्थक ।—[ भय और लज्जा नाट्य कर के ] अमात्य ! हम को क्षमा कीजिये । अमात्य ! हमारा कुछ भी दोष नहीं है मार खाते खाते हम आप का रहस्य छिपा न सके । राक्षस ।—भद्र ! वह कौन सा रहस्य है यह हम को नहीं १५ समझ पड़ता । सिद्धार्थक ।—निवेदन करते हैं, मार खाने से, [ इतना ही कह लज्जा से नीचा मुंह कर लेता है ] । मलयकेतु ।—भागुरायण ! स्वामी के सामने लज्जा और भय से यह कुछ न कह सकेगा, इस से तुम सब बात आर्य्य २० से कहो । भागुरायण ।—कुमार की जो आज्ञा । अमात्य ! यह कहता है कि अमात्य राक्षस ने हम को चिट्ठी दे कर और संदेश कह कर चन्द्रगुप्त के पास भेजा है । राक्षस ।—भद्र सिद्धार्थक ! क्या यह सत्य है ? सिद्धार्थक ।—[ लज्जा नाट्य कर के ] मार खाने के डर से २५ मैंने कह दिया ।

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