मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंछठा अङ्क । १२६
समिद्धार्थक ।—( क्रोध से ) क्या आर्य चाणक्य के पास कोई घातक नहीं है कि ऐसा नीच काम हम लोग करैं ? सिद्धार्थक ।—मित्र ! ऐसा कौन है जिस को इस जीवलोक म रहना हो और वह आर्य चाणक्य की आज्ञा न मानै ? चलो, हमलोग चांडाल का वेष बना कर चन्दनदास को ५ वधस्थान मे लेचलैं ।
( दोनों जाते है )
इति प्रवेशक ।
६ अंक ।
दृश्य । बाहरी प्रान्त में प्राचीन बारी । १० ( फांसी हाथ मे लिए हुए एक पुरुष आता है ) पुरुष—षट गुन सुदृढ़ गुथी मुख फासी । २ जय उपाय परिपाटी गासा ॥ रिपु बन्धन मै पटु प्रति पोरी । जय चानक्य नीति की डोरी ॥ १५ आर्य चाणक्य के चर उन्दुर ने इसी स्थान में मुझ को अमात्य राक्षस से मिलने कहा है । ( देख कर ) यह अमात्य राक्षस सब अङ्ग छिपाए हुए आते हैं । तब तक इस पुरानी बारी मे छिप कर हम देखे, यह कहाँ ठहरते हैं । ( छिप कर बैठता है ) २०
(सब अंग छिपाए हुए राक्षस आता है)
राक्षस—[ आखों में आंसू भर के हाय ! बड़े कष्ट की बात है आश्रय बिनसे और पै, जिमि कुलटा तिय जाय । • तजि तिमि नन्डहि चंचला, चन्द्रहि लपटी धाय ॥