मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१४२ मुद्राराक्षस—
(वेग से राक्षस आता है)
राक्षस ।—डरो मत, डरो मत । सुनो सुनो सेनापति ! चन्दनदास को मत मारना, क्योंकि— नसत स्वामिकुल जिन लख्यो, निज चख शलु समान । ५ मित्रदुख ह्र मै धरयौ, निलज होइ जिन प्रान ॥ तुम सों हारि बिगारि सब कढ़ी न जाकी साल । ता राक्षस के कठ मै, डारहु यह जमफास ॥
च० दा० ।—(देख कर और आखों मे आसू भर कर) अमात्य ! यह क्या करते हो ?
१० राक्षस । मित्र, तुम्हारे सच्चरित्र का एक छोटा सा अनुकरण ।
च० दा ।—अमात्य, मेरा किया तो सब निष्फल हो गया, पर आप ने ऐसे समय यह साहस अनुचित किया ।
राक्षस ।—मित्र चंदनदास ! उराहना मत दो, सभी स्वार्थी है ।
१५ (चाडाल से) अजी ! तुम उस दुष्ट चाणक्य से कहो ।
दोनों चाडाल ।—क्या कह ?
राक्षस ।— जिन कलि मै हू मित्र हित, तृन सम छोड़े प्रान । जाके जस-रवि सामुहे, शिवि जस दीप समान ॥ २० जाको अति निर्मल चरित, दया आदि नित जानि । बौद्धहु सब लज्जित भए, परम शुद्ध जेहि मानि ॥ ता पूजा के पात्र कों, मारत तू धरि पाप । जाके हितु सो शत्रु, तुव, आयो इत मै आप ॥
१ चाडाल । —अरे वेणुवेत्रक ! तू चन्दनदास को पकड़ कर २५ इस मसान के पेड़ की छाया मे बैठ, तब से मन्त्री चाणक्य को मै समाचार दू कि अमात्य राक्षस पकड़ा गया ।